पूर्व पीठीका:- काशीनाथ सिंह मेरे प्रिय लेखकों मे से एक हैं । उनकी यह रचना मुझे अत्यंत प्रिय है
रेहन पर रग्घू
काशीनाथ सिंह
जनवरी की वह शाम कभी नहीं भूलेगी!
शाम तो मौसम ने कर दिया था वरना थी दोपहर! थोड़ी देर पहले धूप थी। उन्होंने खाना खाया था और खाकर अभी अपने कमरे में लेटे ही थे कि सहसा अंधड़। घर के सारे खुले खिड़की दरवाजे भड़ भड़ करते हुए अपने आप बंद होने लगे खुलने लगे। सिटकनी छिटक कर कहीं गिरी , ब्यौंड़े कहीं गिरे जैसे धरती हिल उठी हो, दीवारें कांपने लगी हों। आसमान काला पड़ गया और चारों ओर घुप्प अंधेरा।
वे उठ बैठे!
आंगन और लान बड़े बड़े ओलों और बर्फ के पत्थरों से पट गये और बारजे की रेलिंग टूट कर दूर जा गिरी - धड़ाम! उसके बाद जो मूसलाधार बारिश शुरू हुई तो वह पानी की बूंदें नहीं थीं - जैसे पानी की रस्सियां हों जिन्हें पकड़ कर कोई चाहे तो वहां तक चला जाय जहां से ये छोड़ी या गिरायी जा रही हों। बादल लगातार गड़गड़ा रहे थे - दूर नहीं, सिर के ऊपर जैसे बिजली तड़क रही थी; दूर नहीं, खिड़कियों से अंदर आंखों में।
इकहत्तर साल के बूढे+ रघुनाथ भौंचक! यह अचानक क्या हो गया ? क्या हो रहा है?
उन्होंने चेहरे से बंदरटोपी हटायी , बदन पर पड़ी रजाई अलग की और खिड़की के पास खड़े हो गये!
खिड़की के दोनों पल्ले गिटक के सहारे खुले थे और वे बाहर देख रहे थे।
घर के बाहर ही कदम्ब का विशाल पेड़ था लेकिन उसका पता नहीं चल रहा था - अंधेरे के कारण, घनघोर बारिश के कारण! छत के डाउन पाइप से जलधारा गिर रही थी और उसका शोर अलग से सुनाई पड़ रहा था!
ऐसा मौसम और ऐसी बारिश और ऐसी हवा उन्होंने कब देखी थी ? दिमाग पर जोर देने से याद आया - साठ बासठ साल पहले! वे स्कूल जाने लगे थे - गांव से दो मील दूर! मौसम खराब देख कर मास्टर ने समय से पहले ही छुट्टी दे दी थी। वे सभी बच्चों के साथ बगीचे में पहुंचे ही थे कि अंधड़ और बारिश और अंधेरा! सबने आम के पेड़ों के तने की आड़ लेनी चाही लेकिन तूफान ने उन्हें तिनके की तरह उड़ाया और बगीचे से बाहर धान के खंधों में ले जाकर पटका! किसी के बस्ते और किताब कापी का पता नहीं! बारिश की बूंदें उनके बदन पर गोली के छर्रों की तरह लग रही थीं और वे चीख चिल्ला रहे थे। अंधड़ थम जाने के बाद - जब बारिश थोड़ी कम हुई तो गांव से लोग लालटेन और चोरबत्ती लेकर निकले थे ढूंढ़ने!
यह एक हादसा था और हादसा न हो तो जिन्दगी क्या ?
और यह भी एक हादसा ही है कि बाहर ऐसा मौसम है और वे कमरे में हैं।
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